जब कोई टीम कई ट्रैफ़िक स्रोतों, ऑफ़र, लैंडिंग पेज और भौगोलिक क्षेत्रों (GEO) के साथ काम करती है, तो डेटा विज्ञापन खातों, एफिलिएट नेटवर्क और अन्य सिस्टम में बँटा होता है। खर्च की तुलना कैंपेन के नतीजों से करने के लिए ट्रैकर की ज़रूरत होती है। यह क्लिक को कन्वर्ज़न से जोड़ता है और डेटा सही तरीके से भेजे जाने पर दिखाता है कि कौन-से ट्रैफ़िक सेगमेंट आय ला रहे हैं और कौन-से केवल बजट खर्च कर रहे हैं।
आइए समझें कि रिपोर्ट में कौन-सा डेटा आता है, वह कहाँ से मिलता है और अलग-अलग सिस्टम के आँकड़ों में अंतर क्यों हो सकता है।
ट्रैकर का क्या काम है?
ट्रैकर ट्रैफ़िक स्रोतों, क्लिक, कन्वर्ज़न और उनसे जुड़े कमीशन का डेटा एक जगह लाता है। इससे विज्ञापन क्रिएटिव, प्लेसमेंट, लैंडिंग पेज, ऑफ़र, भौगोलिक क्षेत्र, डिवाइस और ट्रैकर को भेजे गए अन्य पैरामीटर के आधार पर कैंपेन का विश्लेषण किया जा सकता है।
ट्रैकर का मुख्य काम एट्रिब्यूशन है, यानी यह तय करना कि किसी कन्वर्ज़न का श्रेय किस क्लिक और कैंपेन को दिया जाए। सामान्य ट्रैकिंग सेटअप में इसके लिए हर क्लिक की एक यूनिक क्लिक आईडी इस्तेमाल की जाती है।
ट्रैकर के ज़रिए डेटा कैसे भेजा जाता है?
सामान्य सेटअप में उपयोगकर्ता किसी विज्ञापन पर क्लिक करता है और ट्रैकिंग लिंक से होकर आगे बढ़ता है। ट्रैकर क्लिक रिकॉर्ड करता है, ट्रैफ़िक स्रोत से भेजे गए पैरामीटर सेव करता है और फिर उपयोगकर्ता को लैंडिंग पेज, प्रीलैंडिंग पेज या ऑफ़र पेज पर भेज देता है।
अगर उपयोगकर्ता लक्षित कार्रवाई पूरी करता है, तो एफिलिएट नेटवर्क या विज्ञापनदाता का सिस्टम कन्वर्ज़न की जानकारी ट्रैकर को भेजता है। इसके लिए अक्सर पोस्टबैक यूआरएल (Postback URL) इस्तेमाल किया जाता है। कन्वर्ज़न डेटा के साथ क्लिक आईडी भेजी जाती है। सेटिंग्स के अनुसार इसमें कन्वर्ज़न का स्टेटस, प्रकार और संबंधित कमीशन की राशि भी शामिल हो सकती है।
अगर क्लिक आईडी सेव नहीं की गई है या पोस्टबैक में नहीं भेजी गई है, तो ट्रैकर कन्वर्ज़न को किसी खास क्लिक से नहीं जोड़ पाएगा। पोस्टबैक सेटअप में गलती होने पर भी डेटा रिपोर्ट में दिखाई नहीं दे सकता है या गलत तरीके से दिख सकता है।
रीडायरेक्ट के ज़रिए ट्रैकिंग के अलावा कुछ ट्रैकर स्क्रिप्ट की मदद से डायरेक्ट ट्रैकिंग भी सपोर्ट करते हैं। इस स्थिति में उपयोगकर्ता सीधे लक्षित पेज पर पहुँचता है, जबकि विज़िट की जानकारी अलग से ट्रैकर को भेजी जाती है। कौन-सा तरीका चुना जाए, यह ट्रैकर की सुविधाओं और विज्ञापन प्लेटफ़ॉर्म की आवश्यकताओं पर निर्भर करता है।
रिपोर्ट में कौन-सा डेटा दिखाई देता है?
ट्रैकर सारा डेटा खुद इकट्ठा नहीं करता। कुछ पैरामीटर वह विज़िट के दौरान पहचानता है, जबकि दूसरे यूआरएल, एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफ़ेस (API) या पोस्टबैक के ज़रिए मिलते हैं। इसलिए रिपोर्ट में क्या शामिल होगा, यह सेटिंग्स और उपलब्ध इंटीग्रेशन पर निर्भर करता है।
ट्रैफ़िक स्रोत का डेटा
ट्रैकर दिखा सकता है कि कोई क्लिक या कन्वर्ज़न किस कैंपेन, विज्ञापन समूह, क्रिएटिव, प्लेसमेंट या कीवर्ड से आया है। इससे यह पहचानने में मदद मिलती है कि कैंपेन के कौन-से हिस्से कन्वर्ज़न ला रहे हैं और कौन-से केवल बजट खर्च कर रहे हैं।
उदाहरण के लिए, कोई कैंपेन कुल मिलाकर लाभदायक बना रह सकता है, जबकि उसका एक प्लेसमेंट बिना किसी अप्रूव्ड कन्वर्ज़न के पैसे खर्च कर रहा हो। कुल आँकड़ों में यह बात आसानी से नज़र नहीं आती। विस्तृत रिपोर्ट ऐसे ट्रैफ़िक सेगमेंट की पहचान करके उसे समय पर बंद करने में मदद करती है।
विज़िट के पैरामीटर
ट्रैकर के अनुसार रिपोर्ट में भौगोलिक क्षेत्र, डिवाइस का प्रकार, ऑपरेटिंग सिस्टम, ब्राउज़र, भाषा, विज़िट का समय और अन्य तकनीकी पैरामीटर दिखाई दे सकते हैं।
इन सेगमेंट का मूल्यांकन करते समय डेटा की मात्रा को ध्यान में रखना ज़रूरी है। किसी छोटे सेगमेंट में ऊँची कन्वर्ज़न दर (CR) यह साबित नहीं करती कि बड़े पैमाने पर भी उसका प्रदर्शन वैसा ही रहेगा। इसी तरह, कुछ ही क्लिक के बाद खराब नतीजे मिलना उस सेगमेंट को बंद करने का पर्याप्त आधार नहीं है।
कन्वर्ज़न, उनके स्टेटस और कमीशन
ट्रैकर रजिस्ट्रेशन, लीड की जानकारी जमा करने, बिक्री, डिपॉज़िट या किसी अन्य लक्षित कार्रवाई को रिकॉर्ड कर सकता है। अगर एफिलिएट नेटवर्क स्टेटस अपडेट भेजता है, तो रिपोर्ट में शुरुआती, अप्रूव्ड और रिजेक्टेड कन्वर्ज़न को अलग-अलग देखा जा सकता है।
लीड जनरेशन कैंपेन में यह जानकारी लीड की कुल संख्या से ज़्यादा महत्वपूर्ण होती है। किसी क्रिएटिव की प्रति लीड लागत (CPL) कम हो सकती है, लेकिन कम लीड अप्रूवल दर और अप्रूव्ड लीड से कम आय के कारण उसका प्रदर्शन दूसरे क्रिएटिव से कमजोर रह सकता है।
लागत और आय
प्रति अधिग्रहण लागत (CPA), मुनाफ़ा और निवेश पर रिटर्न (ROI) की गणना करने के लिए ट्रैकर को विज्ञापन खर्च और कन्वर्ज़न से जुड़े कमीशन का डेटा चाहिए। यह डेटा API, लिंक पैरामीटर, पोस्टबैक या ट्रैकर द्वारा समर्थित किसी अन्य तरीके से प्राप्त किया जा सकता है।
लाभप्रदता की सटीक गणना के लिए विज्ञापन खर्च के साथ अतिरिक्त परिचालन शुल्क भी शामिल करना ज़रूरी है। कार्ड में बैलेंस जोड़ने को अपने-आप विज्ञापन खर्च नहीं मानना चाहिए। साथ ही, वास्तव में काटी गई राशि का मिलान विज्ञापन खाते के आँकड़ों से करना चाहिए।
Pay2.House के साथ टीम अलग-अलग विज्ञापन खातों के लिए अलग कार्ड रख सकती है और हर कार्ड के लेनदेन देख सकती है। इससे भुगतान लेनदेन का मिलान विज्ञापन प्लेटफ़ॉर्म और ट्रैकर के डेटा से करना आसान होता है। लाभप्रदता की अंतिम गणना में बैलेंस जोड़ने, कार्ड रखरखाव और अन्य लेनदेन पर लागू शुल्क अलग से शामिल किए जाने चाहिए। साथ ही, यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एक ही विज्ञापन खर्च दो बार न गिना जाए।
विज्ञापन खातों के लिए कार्ड आवंटित करने, बजट नियंत्रित करने और भुगतान लेनदेन प्रबंधित करने के बारे में अधिक जानने के लिए हमारा लेख «डिजिटल एजेंसियों के लिए भुगतान सुरक्षा चेकलिस्ट: विज्ञापन बजट की सुरक्षा कैसे करें» पढ़ें।
डेटा के आधार पर कौन-से निर्णय लिए जा सकते हैं?
ट्रैकर का काम केवल विज्ञापन प्लेटफ़ॉर्म के आँकड़ों को दोबारा दिखाना नहीं है। इसकी उपयोगिता मुनाफ़े या नुकसान के किसी खास स्रोत की पहचान करने में है।
रिपोर्ट की मदद से टीम:
- अप्रूव्ड कन्वर्ज़न और आय के आधार पर क्रिएटिव की तुलना कर सकती है;
- एक जैसे ट्रैफ़िक सेगमेंट पर लैंडिंग पेज और ऑफ़र का मूल्यांकन कर सकती है;
- नुकसान देने वाले प्लेसमेंट, विज्ञापन ज़ोन या कीवर्ड बंद कर सकती है;
- भौगोलिक क्षेत्र, डिवाइस और ऑपरेटिंग सिस्टम के आधार पर प्रदर्शन देख सकती है;
- आगे की टेस्टिंग और स्केलिंग के लिए उपयुक्त सेगमेंट चुन सकती है।
आँकड़ों में अंतर क्यों हो सकता है?
विज्ञापन खाता, ट्रैकर और एफिलिएट नेटवर्क एक ही अवधि के लिए भी अलग-अलग आँकड़े दिखा सकते हैं। इसके सामान्य कारण हैं:
- टाइम ज़ोन और रिपोर्टिंग दिन के शुरू व खत्म होने के समय में अंतर;
- अलग-अलग एट्रिब्यूशन मॉडल और एट्रिब्यूशन विंडो;
- कन्वर्ज़न की जानकारी भेजने में देरी;
- बार-बार होने वाली विज़िट और यूनिक क्लिक गिनने के नियमों में अंतर;
- क्लिक आईडी का न होना या पोस्टबैक में गलती;
- क्लिक और कन्वर्ज़न रिकॉर्ड होने की तारीखों में अंतर।
अगर बड़ा अंतर दिखाई दे, तो पहले टाइम ज़ोन, रिपोर्ट की अवधि, एट्रिब्यूशन मॉडल, लिंक पैरामीटर और पोस्टबैक लॉग जाँचें। इन जाँचों को पूरा करने से पहले ट्रैफ़िक की गुणवत्ता का मूल्यांकन करने पर गलत निष्कर्ष निकल सकते हैं।
विज्ञापन कैंपेन के विश्लेषण का उदाहरण
एक टीम दो लैंडिंग पेज टेस्ट कर रही है। कुल CPA स्वीकार्य सीमा से ऊपर है, लेकिन पूरे कैंपेन को बंद करने का निर्णय लेना अभी जल्दबाज़ी होगी।
एक काल्पनिक उदाहरण लेते हैं, जिसमें दोनों लैंडिंग पेज को बराबर क्लिक और समान विज्ञापन बजट मिला है।
| मेट्रिक | लैंडिंग पेज A | लैंडिंग पेज B |
|---|---|---|
| क्लिक | 500 | 500 |
| विज्ञापन खर्च | $200 | $200 |
| लीड | 30 | 20 |
| अप्रूव्ड लीड | 8 | 14 |
| आय (प्रति अप्रूव्ड लीड $25) | $200 | $350 |
| निवेश पर रिटर्न | 0% | 75% |
ये आँकड़े केवल उदाहरण के लिए हैं और इनमें अतिरिक्त शुल्क शामिल नहीं हैं।
रिपोर्ट दिखाती है कि पहले लैंडिंग पेज ने ज़्यादा शुरुआती कन्वर्ज़न दिए, लेकिन उसकी लीड अप्रूवल दर कम थी। दूसरे पेज से कम लीड मिले, फिर भी अप्रूवल दर और आय के मामले में उसका प्रदर्शन बेहतर रहा। डेटा को और बारीकी से बाँटकर देखने पर पता चलता है कि नुकसान देने वाला अधिकांश ट्रैफ़िक एक ही प्लेसमेंट से आ रहा है।
इस डेटा के आधार पर टीम कमजोर प्रदर्शन वाले प्लेसमेंट को अलग से बंद कर सकती है, दोनों लैंडिंग पेज के बीच ट्रैफ़िक का बँटवारा बदल सकती है और नया डेटा सैंपल मिलने के बाद CPA का दोबारा मूल्यांकन कर सकती है। ट्रैकर मीडिया बायर की जगह निर्णय नहीं लेता, लेकिन नुकसान देने वाले सेगमेंट के साथ लाभदायक सेगमेंट भी बंद कर देने से बचने में मदद करता है।
लॉन्च से पहले क्या जाँचना चाहिए?
कैंपेन लॉन्च करने से पहले एक टेस्ट क्लिक और एक टेस्ट कन्वर्ज़न करना चाहिए। जाँच में डेटा के पूरे प्रवाह को शामिल करना ज़रूरी है:
- ट्रैफ़िक स्रोत के पैरामीटर रिपोर्ट में दिखाई दे रहे हैं या नहीं;
- विज़िट और रीडायरेक्ट, अगर इस्तेमाल किए गए हैं, सही लैंडिंग पेज और ऑफ़र तक पहुँच रहे हैं या नहीं;
- क्लिक आईडी सेव होकर अगले चरणों तक भेजी जा रही है या नहीं;
- ट्रैकर को पोस्टबैक के ज़रिए टेस्ट कन्वर्ज़न मिल रहा है या नहीं;
- रिपोर्ट के लिए ज़रूरी होने पर स्टेटस और कमीशन की राशि भेजी जा रही है या नहीं;
- दोबारा आने वाले पोस्टबैक और एक ही क्लिक आईडी से जुड़े कई कन्वर्ज़न ट्रैकर की सेटिंग्स के अनुसार प्रोसेस हो रहे हैं या नहीं;
- लागत सही मुद्रा में इंपोर्ट हो रही है या नहीं;
- सभी सिस्टम के टाइम ज़ोन जाँचे गए हैं और समान अवधि के डेटा की तुलना की जा रही है या नहीं।
निष्कर्ष
ट्रैकर क्लिक को कन्वर्ज़न से जोड़ता है और ट्रैफ़िक स्रोत, क्रिएटिव, लैंडिंग पेज तथा अन्य सेगमेंट के आधार पर कैंपेन का मूल्यांकन करने में मदद करता है। विश्लेषण की सटीकता भेजे गए पैरामीटर, पोस्टबैक सेटअप और लागत व कमीशन के डेटा की पूर्णता पर निर्भर करती है।
इस प्रक्रिया का एक भी हिस्सा गलत तरीके से सेटअप होने पर लाभदायक कैंपेन नुकसान देने वाला लग सकता है, जबकि नुकसान देने वाला कैंपेन संभावनाओं से भरा दिखाई दे सकता है।
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