सेवा का विवरण
Cleverbridge के चेकआउट के जरिए आम तौर पर सॉफ्टवेयर लाइसेंस, डिजिटल डाउनलोड, सब्सक्रिप्शन प्लान, ऑटो-रिन्यूअल, अपग्रेड/ऐड-ऑन और मेंटेनेंस/सपोर्ट जैसी चीज़ों का भुगतान किया जाता है। कई बार आपके बैंक स्टेटमेंट में मर्चेंट के रूप में “Cleverbridge” दिखता है, क्योंकि यह कई सॉफ्टवेयर ब्रांड्स के लिए पेमेंट और ऑर्डर प्रोसेसिंग संभालता है।
ऐसे भुगतानों के लिए Pay2.House के वर्चुअल पेमेंट कार्ड उपयोगी हो सकते हैं—खासकर जब आपको ऑनलाइन सॉफ्टवेयर खर्चों को व्यवस्थित रखना हो या अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग कार्ड रखना हो। आप Cleverbridge के चेकआउट पेज पर कार्ड डिटेल्स दर्ज करके सब्सक्रिप्शन शुरू करने, लाइसेंस रिन्यू कराने या एक बार की खरीद (one-time purchase) करने जैसे भुगतान कर सकते हैं (स्वीकृति मर्चेंट/बिलिंग नियमों पर निर्भर करती है)।
व्यावहारिक तौर पर, वर्चुअल कार्ड का फायदा तब बढ़ जाता है जब आपके पास कई सॉफ्टवेयर टूल्स हों। उदाहरण के लिए, एक कार्ड केवल “टूल सब्सक्रिप्शन” के लिए, दूसरा “लाइसेंस रिन्यूअल” के लिए, और तीसरा किसी खास प्रोजेक्ट/क्लाइंट के सॉफ्टवेयर खर्चों के लिए रखा जा सकता है। इससे अकाउंटिंग आसान होती है और यह स्पष्ट रहता है कि कौन-सा Cleverbridge चार्ज किस उद्देश्य के लिए था।
टीम या बिज़नेस उपयोग में, अलग-अलग विभागों (जैसे डिज़ाइन, डेवलपमेंट, सेल्स) के लिए अलग कार्ड जारी करके Cleverbridge के जरिए खरीदे गए सॉफ्टवेयर/प्लगइन्स/टूल्स के खर्चों को अलग-अलग ट्रैक करना सुविधाजनक रहता है। यदि किसी सब्सक्रिप्शन का ट्रायल खत्म होने के बाद रिन्यूअल होना है, तो उसी सब्सक्रिप्शन के लिए अलग कार्ड रखने से भुगतान प्रबंधन अधिक व्यवस्थित हो सकता है।
यदि आप अंतरराष्ट्रीय सॉफ्टवेयर विक्रेताओं से खरीद करते हैं, तो Pay2.House वर्चुअल कार्ड ऑनलाइन कार्ड पेमेंट के लिए एक व्यावहारिक विकल्प बन सकते हैं—विशेषकर तब, जब आप अपने मुख्य कार्ड की जानकारी हर जगह साझा नहीं करना चाहते और भुगतान को अलग कार्ड पर रखना चाहते हैं। Cleverbridge से जुड़े भुगतान करते समय हमेशा ऑर्डर कन्फर्मेशन, इनवॉइस/रसीद और रिन्यूअल शेड्यूल को सेव रखें, ताकि बाद में चार्ज रिकन्सिलिएशन और खर्च रिपोर्टिंग आसान रहे।